केदारनाथ मंदिर सोना प्रकरण में अजेंद्र अजय को मिली क्लीन चिट

*केदारनाथ सोना विवाद: कमिश्नर की जाँच रिपोर्ट में पूर्व बद्री केदार मदिर समिति अध्यक्ष अजेंद्र अजय को मिली क्लीन चिट, 

बेनकाब हुए साजिश कर्ता, सरकार को करनी चाहिए साजिश कर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई

हरिद्वार 23 सितंबर( संजय वर्मा )बद्री केदार मंदिर समिति सोना जांच रिपोर्ट में पूर्व अध्यक्ष अजेंद्र अजय निर्दोष और निष्कलंक  साबित हुए अब सरकार को उन लोगों पर कार्रवाई करनी चहिए जिन्होंने साजिश रच कर अपने कार्यकाल के दौरान ईमानदार निष्ठावान और ऊर्जावान जनप्रतिनिधि को कार्य करने मे बाधित किया और उनके पूरे कार्यकाल मे  साज से रच कर भ्रष्ट   साबित करने की कोशिश की , केदारनाथ धाम के बहुचर्चित सोना प्रकरण में गढ़वाल कमिश्नर की जांच रिपोर्ट सूचना के अधिकार के माध्यम से सार्वजनिक हो गई है। जैसी कि जानकारी मिली है कि कमिश्नर विनय शंकर पांडेय के साथ पूर्व में रुद्रप्रयाग में जिलाधिकारी के रूप में तैनात रहे दो आईएएस अधिकारी मयूर दीक्षित, सौरभ गहरवार और वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी योगेंद्र सिंह ने केदारनाथ जा कर इस प्रकरण की विस्तृत जांच की। मामले से जुड़े विभिन्न दस्तावेजों की छानबीन की।

कमिश्नर पांडेय ने अपनी जांच रिपोर्ट में विस्तार से तथ्यों की जानकारी दी है।कमिश्नर की रिपोर्ट का निष्कर्ष यह है कि मंदिर समिति ने ना ही ख़ुद सोना ख़रीदा और ना ही अपने स्तर से इसे लगवाया। मंदिर समिति ने मात्र शासन के निर्देश पर दानीदाता को इस कार्य में जरूरी सहयोग किया। 

कमिश्नर की जांच रिपोर्ट से यह साफ हो गया कि कि मंदिर समिति की इसमें कोई भूमिका नहीं थी। शासन स्तर से जारी निर्देशों के क्रम में यह कार्य संपादित कराया गया। इसके साथ ही इस विवाद का पटाक्षेप भी हो गया है। 

मगर कई सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं। पहला तो यह कि पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के निर्देश पर हुई इस जांच की रिपोर्ट गढ़वाल कमिश्नर ने करीब एक वर्ष से भी अधिक समय पहले शासन को भेज दी थी। स्वयं मंत्री जी कई बार बयान देते रहे कि वो जांच रिपोर्ट जारी करने वाले हैं। मगर इसके बावजूद उन्होंने रिपोर्ट जारी नहीं की। अंतत सूचना के अधिकार के द्वारा रिपोर्ट जारी हुई। 

इस विवाद में सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि मंदिर समिति के तत्कालीन अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने व्यवस्थाओं में सुधार के लिए कई बड़ी पहल की थीं। मंदिर समिति के इतिहास में पहली बार कर्मचारियों के ट्रांसफर किए गए। कर्मचारियों के लिए पहली बार सेवा नियमावली बनायी गई। ताकि नियुक्तियों से लेकर पदोन्नति, वेतन वृद्धि आदि में अंदर खाने चल रहे खेल को बंद किया जा सके। इतना बड़ा संस्थान होने के बावजूद मंदिर समिति में वित्त अधिकारी का पद नहीं था। अजेंद्र ने पद सृजित करा कर प्रदेश वित्त सेवा के अधिकारी की नियुक्ति करायी। इससे मंदिर समिति में वित्तीय गड़बड़ियों पर बहुत हद तक अंकुश लगा।

अजेंद्र की यह पहल मंदिर समिति में दीमक की तरह चिपके संगठित गिरोह को पसंद नहीं आई और उन्होंने षडयंत्र रचने शुरू कर दिए। इसमें उनकी पार्टी के कुछ नेता भी शामिल थे, जो अजेंद्र की स्वच्छ व ईमानदारी वाली छवि को धूमिल करना चाहते थे। उन्होंने सोना विवाद  की कहानी लिखी और अपनी पूरी क्षमता लगा कर अजेंद्र को घेरने का दुष्प्रयास किया। 

अजेंद्र ने अपने धीर- गंभीर स्वभाव के अनुरूप समय- समय पर मामले को लेकर तथ्य सार्वजनिक भी किए। उन्होंने स्वयं भी इस विवाद की उच्चस्तरीय जांच का अनुरोध सरकार से किया था। बदरीनाथ- केदारनाथ धामों में QR कोड लगाने के प्रकरण में भी अजेंद्र ने बदरीनाथ थाने में मुकदमा दर्ज करवाया था। QR कोड मामले में चमोली पुलिस की सुस्त कार्रवाई पर अजेंद्र सार्वजनिक रूप से भी अपनी नाराज़गी जता चुके हैं ।

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