योग नृत्य ब्रह्म संवाद कार्यक्रम का व्यास आश्रम में हुआ शुभारंभ

 “योगनृत्ये ब्रह्मसंवादः” आवासीय कार्यशाला का हुआ शुभारंभ 

हरिद्वार 27 अक्टूबर वैदिक  संस्कृति कला केन्द्र, ऋषिकेश  के तत्वाधान में हरिद्वार के व्यास आश्रम में  “योगनृत्ये ब्रह्मसंवादः” नामक पाँच दिवसीय नृत्य की आवासीय कार्यशाला का उद्घाटन किया गया। संस्था के संस्थापक तथा परम पूज्य गुरु गोविंददेव गिरी जी महाराज के शिष्य आचार्य प्रसन्न जी ने कहा कि यह आयोजन भारतीय शास्त्रीय नृत्य और योग की गहन साधना को एक सूत्र में पिरोते हुए, साधकों को आत्मानुभूति और सृजनशीलता की दिशा में प्रेरित करेगा।
वैदिक संस्कृति कला केन्द्र भारतीय जीवन के उस शाश्वत दृष्टिकोण को पुनः प्रतिष्ठित करने का प्रयास कर रहा है, जहाँ कला केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि साधना और आत्मा की अभिव्यक्ति है। इस में भारत के विभिन्न राज्यों से एवं विदेशों से भरतनाट्यम और कथक नृत्य के छात्र तथा शिक्षक प्रतिभाग कर रहे है। 
इस कार्यशाला के उद्घाटन में आवासीय कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिदिन योग, प्राणायाम और ध्यान सत्र, श्रीमद्भगवद्गीता पर आधारित संवाद, ध्वनि चिकित्सा ध्यान, नृत्य रचनाओं का अध्ययन, संगीत सत्र, ताल एवं सृजनशीलता पर कार्यशालाएँ, तथा हरिनाम संकीर्तन, प्रभात फेरी और गंगा आरती जैसी आध्यात्मिक गतिविधियाँ आयोजित होंगी।

उद्घाटन में मुख्य अतिथि के रूप में महामंडलेश्वर स्वामी अभिषेक चैतन्यगिरी जी महाराज , 
ऋषिराज सुनील भगत जी, 

हरिद्वार की मेयर श्रीमती किरण जैसल, 
श्रीमान आशुतोष शर्मा भाजपा जिलाध्यक्ष हरिद्वार
तथा पार्षद आकाश भाटी 

उपस्थित रहे और अपने आशीर्वचन एवं शुभकामनाएं प्रदान की । इस संस्था के संरक्षक आचार्य अंकित जी तथा संयोजिका डॉ. स्मृति वाघेला  ने बताया कि इस कार्यशाला में प्रसिद्ध गुरुजनों और विद्वानों द्वारा सत्र संचालित किए जाएँगे, जिससे प्रतिभागियों को भारतीय कला की जड़ों से जुड़ने और उसमें नई चेतना का संचार करने का अवसर मिलेगा। 

महर्षिवेदव्यास प्रतिष्ठान के संस्थापक पूज्य स्वामी गोविंद देव गिरिजी महाराज के शिष्य व प्रतिष्ठित अधिवक्ता श्री विजय कुमार उपाध्याय ने इस सत्र का बड़े ही सुंदर ढंग से मंच संचालन किया।
इस आयोजन के दृष्टिकोण की सराहना करते हुए मुरुगन स्वीट एंड रेस्टोरेंट  इस कलायज्ञ में मुख्य सहयोगी बने। इस आयोजन को लेकर एडवोकेट विजय उपाध्याय ने कहा कि वैदिक संस्कृति कला केन्द्र का उद्देश्य भारत की अमूल्य वैदिक एवं कलात्मक परंपराओं का संरक्षण, संवर्धन और प्रसार करते हुए उन्हें आधुनिक समाज के साथ जोड़ना है। यह आयोजन उसी दिशा में एक सशक्त कदम है, जहाँ नृत्य योगमय बनकर ब्रह्म की अनुभूति का माध्यम बनता है। उद्घाटन सत्र में आए हुए अतिथियों का स्वागत आचार्य अंकित, प्रशांत, प्रदीप अवस्थी आदि न किया ।


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