गोविंद घाट पर बह रही है अध्यात्म और ज्ञान की गंगा
हरिद्वार 24 फरवरी श्री गोविन्द घाट पर आयोजित त्रिदिवसीय सत्संग के पहले दिन सतपुरुष बाबा फुलसंदे वालों ने कहा_ कि इस सृष्टि में जब कुछ भी नहीं था वह आदि पुरुष वो पारब्रह्म ही मेरी आत्मा के सामने था उस आदि पुरुष की रोशनी में मैं उसके आगे मस्तक झुकाए उसकी आराधना करता था उसको सजदे करता था उन बातों में कुछ बातें मुझे याद रही और बहुत सी बातें मैं भूल गया देव आत्माओं के संग संग मैं स्वर्ग के फूलों को चुगता था उन फूलों पर परम ब्रह्म के वेद मत्रों को पढ़-पढ़ कर हे आदि पुरुष मैं तेरा अभिषेक करता था हे अनंत ब्रह्म हे परमात्मा उसमें से कुछ आज भी मुझे याद है और बहुत सी बातें मैं भूल चुका हूं लाखों बरस कभी पतझड़ कभी बहार कभी बसंत तरह-तरह के मौसम आते रहते हैं मनुष्यों का जीवन कभी गरद गुबार से और कभी ज्ञान की रोशनी से भर जाता है जो उपवन थे गुलशन थे वह आज भी कहीं-कहीं महकते हैं और कितने ही उजड़ गए उनमें से कुछ मुझे याद आते रहते हैं और बहुतसों को मैं भूल चुका। हे सनातन शाखा हे मेरे अनादि मित्र तुम मेरे साथ थे तो पूर्णमासी की रात थी चारों तरफ उजाला फैला था जब से मेरी आत्मा तुमसे अलग हुई जुदा हुई, फूल भी खिलने बंद हो गए, मेरे आंचल में मेरे दामन में केवल कुछ दाग बाकी रह गए उन बहुत सी बातों को मैं भूल चुका, बहुत सी बातें आज भी मुझे याद हैं ।यह दुनिया बनती बिगड़ती रहती है मनुष्य की कामनाएं अनंत हैं वह खुशियों को ढूंढता रहता है मगर वह खुशियां उसे प्राप्त नहीं होती । ब्रह्म रूप गुरु के चरणों पर मेरी परछाई रात दिन पड़ी रही नतमस्तक रही यह जीवन न जाने कहां पर खो गया, खोखरे बांस जैसा हो गया, कभी इसमें से बांसुरी के स्वर निकले और कभी बेसुरे स्वर निकले, पूरन धनी मेरे सतगुरु तू तो आत्माओं का शिल्पी है, उनको रंगता रहता है। ज्ञान के नक्श निगार उन पर उकेरता रहता है , ब्रह्मा वेदों का शिल्पी है वह तरह-तरह के मंत्र वेद में लिखता रहता है। यह मन मनुष्य का सुख और दुख का शिल्पी है, मनुष्य स्वयं अपने कर्मों का शिल्पी है, क्या-क्या दुनिया में आकर करता है और क्या इसको करना चाहिए था यह इसे ध्यान ही नहीं रहता तेरे अखंड ध्यान में लीन थी मेरी आत्मा फुलसंदे वाले बाबा कहें सुन मेरे परमात्मा मेरी आत्मा नाचती फिरी जाने किस-किस गली में कितनी बातें आज भी मुझे याद रहीं और कितनी बातें मैं भूल गया ।। सत्संग के पश्चात बहुत से लोगों ने मंत्र दीक्षा प्राप्त की और भोजन का प्रसाद भी ग्रहण किया।
सत्संग में मुख्यतया पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री मदन कौशिक, हरिद्वार की मेयर श्रीमती किरण जैसल, श्री जसवंत सिंह, नंदकिशोर गिरी, आकाश त्यागी, रणजीत सिंह राणा, अनुज चौधरी, अमरनाथ मदान, देवपाल राठी, प्रदीप मिश्रा, डॉ अशोक शर्मा आर्य, भावना शर्मा, अलख निरंजन, सुभाष अरोड़ा, राजेंद्र सिंह, दीपक राठौड़, मधु मेहंदी रत्ता, उर्मिला सिंह, अलका मेहंदी रता, बिना मदन, सुषमा देव पुत्री इत्यादि श्रद्धालु उपस्थित रहे।
एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा
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