भाषा की मर्यादा लांघे मंगलोर के विधायक काजी निजामुद्दीन

जनता की थाली का अपमान: क्या माफी मांगेंगे विधायक काजी निजामुद्दीन?" :गौरव भारद्वाज

देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा में विकास के आंकड़ों पर चर्चा के दौरान मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन ने सारी मर्यादाएं लांघ दीं। उन्होंने सदन के भीतर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल जी को 'कुपोषित' (Malnourished) कहकर न केवल एक व्यक्ति, बल्कि प्रदेश की गरीब जनता और राशन लाभार्थियों का मजाक उड़ाया है।
जनता का पक्ष और गहरा आक्रोश:
उत्तराखंड की माताओं-बहनों और गरीब परिवारों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि एक विधायक 'कुपोषण' जैसे संवेदनशील शब्द को 'गाली' या 'कटाक्ष' की तरह कैसे इस्तेमाल कर सकता है?
गरीबों का उपहास: जनता का कहना है कि सरकार जो राशन और पोषण योजनाएं चला रही है, विधायक निजामुद्दीन का यह बयान उन सभी लाभार्थियों का अपमान है जो अभावों से लड़कर आगे बढ़ रहे हैं।
मंत्री जी का 'योद्धा' रूप: जब विधायक ने यह ओछी टिप्पणी की, तो कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल जी ने एक सच्चे योद्धा की तरह इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष के पास विकास के मुद्दे नहीं हैं, इसलिए वे व्यक्तिगत शरीर और अभावों पर टिप्पणी कर रहे हैं।
माफी की मांग: सोशल मीडिया पर 'जनता के हित' में यह मांग उठ रही है कि काजी निजामुद्दीन को प्रदेश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। किसी गरीब की स्थिति या स्वास्थ्य का मजाक उड़ाना एक जनप्रतिनिधि को शोभा नहीं देता।
कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल जी हमेशा सीधे और स्पष्ट संवाद के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने सदन में सरकार और जनता के स्वाभिमान का बचाव किया है। अब गेंद विधायक के पाले में है—क्या वे गरीबों के इस अपमान पर माफी मांगेंगे?

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