प्रशासनिक संवाद से ही संभव है कानून व्यवस्था और सामाजिक सुधार :- गौरव भारद्वाज
प्रशासनिक संवाद से ही संभव है कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द: गौरव भारद्वाज
मेरठ। सजग प्रतिनिधि गौरव भारद्वाज ने कलेक्ट्रेट परिसर में हुए हालिया घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए समाज से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
नगीना सांसद चंद्रशेखर आज़ाद (रावण) के संदर्भ में बात करते हुए उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के रूप में उन्हें और उनके सहयोगियों को यह विचार करना चाहिए कि देश और समाज में कानून-व्यवस्था को किस प्रकार सुदृढ़ किया जा सकता है।
उग्र प्रदर्शनों से कई बार स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है, जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने का खतरा बना रहता है।उन्होंने प्रशासनिक और पुलिस तंत्र, विशेषकर एसएसपी अविनाश पांडेय के रुख का व्यावहारिक बचाव करते हुए कहा कि एक जिले के कप्तान का प्राथमिक दायित्व किसी भी परिस्थिति में बड़ी जनहानि या अप्रिय घटना को रोकना होता है। जब कलेक्ट्रेट परिसर में अचानक भीड़ बेकाबू होने लगी, तो वहां किसी भी प्रकार की अनहोनी, भगदड़ या 'मॉब लिंचिंग' जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती थी। ऐसे नाजुक मोड़ पर माहौल को और बिगड़ने से बचाने के लिए प्रशासन को मजबूरीवश सख्त कदम उठाने पड़े, जिसका उद्देश्य केवल शांति बहाल करना था। चूंकि पुलिस पहले ही मुख्य आरोपी अंकुश को तत्परता से गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी थी, इसलिए कानून को अपना काम करने का समय दिया जाना चाहिए था।उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि मंशा वास्तव में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की थी, तो प्रबुद्ध लोगों का एक 4-5 सदस्यीय शिष्टमंडल (डेलिगेशन) शांतिपूर्वक डीएम और एसएसपी से मिलकर अपनी बात रख सकता था। प्रशासन को लिखित में सूचित किया जा सकता था कि यदि तय समय में उचित जांच नहीं हुई, तो वे आगे लोकतांत्रिक कदम उठाएंगे। सीधे टकराव के बजाय संवाद का यह रास्ता अधिक प्रभावी और सुरक्षित होता है।
अंत में उन्होंने अपील की कि समाज के किसी भी वर्ग को उत्तेजना में आने के बजाय देश की न्यायपालिका और प्रशासनिक जांच प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए, ताकि क्षेत्र में शांति और अमन-चैन कायम रहे।
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