तक्षशिला विश्वविद्यालय पीठ की महा बैठक का धर्म नगरी में हुआ आयोजन

तक्षशिला विश्वविद्यापीठ के उच्च-प्राथमिक प्रकल्प का लोकार्पण सम्पन्न...

हरिद्वार 28 जनवरी धर्मनगरी हरिद्वार में विगत दिनों आयोजित हुई तक्षशिला परियोजना की त्रिदिवसीय अष्टम् राष्ट्रीय बैठक में पूरे देश से आए हुए 40 से अधिक धर्मनिष्ठ समाजसेवियों एवं शिक्षाविदों ने भाग लिया। ‘तक्षशिला परियोजना' के बैनर तले उसकी मातृ संस्था ‘हिंगलाज मानव सेवा संस्था न्यास'’ के द्वारा आयोजित की गई इस महाबैठक का संयोजन हरिद्वार-ऋषिकेश के प्रबुद्ध मनीषी आचार्य डॉ० कमलेश काण्डपाल के द्वारा किया गया। इस बैठक में तक्षशिला विश्वविद्यापीठ, लखीमपुर खीरी में स्थापित किए गए संस्थान तक्षशिला विश्वविद्यापीठ के उच्च-प्राथमिक भवन का लोकार्पण किया गया। यह लोकार्पण दिनांक 24 जून, 2022 को लखीमपुर नगर में प्रारंभ किए गए 'प्रोजेक्ट तक्षशिला' इनिशिएटिव के 1,312वें दिन एवं दिनांक 19 मार्च, 2025 को लोकार्पित हुए तक्षशिला विश्वविद्यापीठ के प्राथमिक भवन के लोकार्पण के 313वें दिन सम्पन्न हुआ।

बैठक के प्रथम सत्र का शुभारंभ मां वाग्देवी की वन्दना के साथ हुआ। तदोपरांत हिंगलाज मानव सेवा संस्थान न्यास की राष्ट्रीय शैक्षणिक पहल ‘तक्षशिला परियोजना’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एड० राहुल तिवारी ने सभी आगंतुक सहयोगियों को तक्षशिला परियोजना के द्वारा गत वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में किए गए कार्यों के विषय में विस्तार से जानकारी प्रदान की। उनके साथ ही बड़ौत, बागपत से आए तक्षशिला विद्यापरिषद के अध्यक्ष चौधरी अमित बालियान ने तक्षशिला विश्वविद्यापीठ के विद्या-पाठ्यक्रमों की महत्ता एवं उनकी भविष्यगामी प्रभावशीलता के विषय में सभा को अवगत करवाया। तत्पश्चात बैठक में पंजाब राज्य के खन्ना एवं उत्तर प्रदेश के इलेक्ट्रॉनिक सिटी नोएडा महानगर से आए न्यास के वरिष्ठ न्यासियों एवं संस्थापक सदस्यों- विकास कुमार एवं रणधीर सिंह राठौर के द्वारा प्रस्तावित भारत की प्राचीन शिक्षा-पद्धति को नवोन्मेषी शिक्षा नीति के साथ आबद्ध करके देश के भावी कर्णधारों को तैयार करने की योजना पर गहन विचार-मंथन किया गया।

उत्तर प्रदेश के ही नोएडा महानगर से आए विद्यापीठ के संस्थापक सदस्य पंकज गोयल एवं अजय अग्रवाल ने सभा को बताया कि तक्षशिला विश्वविद्यापीठ को उसके मूल स्वरूप में पुनर्स्थापित करने का प्रण लेने वाले धर्मनिष्ठ शिक्षाविद, पिछले एक दशक में किन-किन समस्याओं और अवरोधों का सामना करते हुए इस महान संस्थान को कल्पना से वास्तविक धरातलीय बनाने में संघर्षरत हैं? सभा से विद्यापीठ के विस्तारीकरण में सहयोग का आह्वान करते हुए उन्होंने इस कार्य में अपना समर्पण प्रदान कर रहे सभी सहयोगियों का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया एवं ईश्वर से उनके उज्ज्वल भविष्य एवं समृद्धता की कामना की। 

बैठक के विभिन्न सत्रों के मध्य कुछ विशेष सत्र सांकृतिक उन्नयन एवं ध्यान व योग को समर्पित भी रहे। बैठक के प्रथम दिवस की सांध्य बेला में लखनऊ से पधारी सेजल कक्कड़ द्वारा आयोजित लघु सांस्कृतिक सत्र में भारतवर्ष के ‘अनेकता में एकता’ नामक मूलमंत्र की आधारीयता को दृढ़ करने वाले बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया। बैठक में लखनऊ से ही पधारे डॉ० मनीष प्रताप सिंह एवं आचार्य डॉ० कमलेश काण्डपाल ने मां गंगा के तट पर बैठक में सम्मिलित हुए सभी सदस्यों को योग, आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा के विषय में विशेष जानकारियां प्रदान कीं। इसी के साथ बैठक संयोजक मण्डल के सदस्य आचार्य राम चंद्र पाण्डेय ने गंगा तट पर आगंतुक सदस्यों को नमामि गंगे परियोजना की सफलता और उसके लिए उनके द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी प्रदान की ।

उक्त के अतिरिक्त बैठक में भाग लेने वाले सहयोगी सदस्यों में उत्तर प्रदेश के आगरा से मुकेश सिंह राठौर, बुलंदशहर से अजय चौधरी व योगेश कुमार सिंह, ग़ाज़ियाबाद से ब्रह्मजीत गहलौत, चंदौली से कृष्णानन्द तिवारी व मनीष कुमार सिंह एवं बड़ौत से शिवम सिंह कुंडू उपस्थित रहे। उत्तराखण्ड के देहरादून से इन्द्रेश जोशी व त्रिलोक काण्डपाल एवं ऋषिकेश से अश्वनी दीक्षित ने अपनी उपस्थिति सुनिश्चित की। इसके साथ ही झारखंड के जमशेदपुर से सीए राकेश बनर्जी, जम्मू एवं कश्मीर से अजीत कुमार मिश्रा, दिल्ली से सतीश सहरावत व एड० वैभव सिंह, हरियाणा के जींद से मंदीप सिंह गोयत व मनदीप मोर एवं गुरुग्राम से मनीष निमावत बैठक के महत्वपूर्ण अंग बने।

पंजाब के लुधियाना से पधारे प्रोजेक्ट तक्षशिला के आधारीय स्तंभ अरविंद कुमार कौंडल, सोनू दुबे एवं रोहित वर्मा ने कार्यक्रम में न्यास के दूरगामी लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में आवश्यक योजनाओं पर परिचर्चा एवं विचार-मंथन किया। पश्चिम बंगाल के कोलकाता से रमाकांत निषाद एवं गुजरात के सूरत से राकेश जबरचंद भाई छीपा ने भी दूरस्थ स्थानों से आकर प्रोजेक्ट तक्षशिला की अष्टम् बैठक को पूर्णता प्रदान की। स्वास्थ्यगत समस्याओं के चलते बंगाल के पश्चिमी मेदिनीपुर से विद्यापीठ के महाकुलाधिपति दुर्गा प्रसाद मुखर्जी, उत्तर प्रदेश के एटा से विद्यापीठ के चेयरपर्सन एवं प्रमुख सलाहकार डॉ० अशोक कुमार, चंडीगढ़ से सीए राकेश मलिक एवं सीए नलिनी मलिक वर्चुअल उपस्थिति के द्वारा बैठक की कार्यवाही के साक्षी बने।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर नगर से पधारे तक्षशिला परियोजना निर्माण कार्यकारिणी के अध्यक्ष इंजी० रवि सिंह ने सभी आगंतुक सहयोगियों के द्वारा पूर्व में व्यक्त किए गए विचारों का समग्र आकलन कर उनके आधार पर प्रोजेक्ट तक्षशिला के भविष्यगामी लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु ठोस रणनीति बनाने और उसको क्रियान्वित करने पर बल दिया। वरिष्ठ न्यासी रणधीर सिंह राठौर, चौधरी अमित बालियान, एड० राहुल तिवारी समेत सभी बैठक सदस्यों ने इंजी० रवि सिंह द्वारा प्रस्तावित कार्ययोजना को त्वरित रूप से क्रियान्वित करने के लिए शीघ्रातिशीघ्र एक नव-कार्यकारिणी का गठन कर उसकी योजना-निर्माण करने का आश्वासन प्रदान किया।

तत्पश्चात तक्षशिला विश्वविद्यापीठ संस्थान के कुलाधिपति एवं हिंगलाज मानव सेवा संस्थान न्यास संस्थापक एवं अध्यक्ष आचार्य श्रीवृत्त के अनुमोदन पर वरिष्ठ न्यासी पंकज गोयल ने तक्षशिला कार्यकारिणी के विस्तार की घोषणा की जिसमें आगामी वित्त-वर्ष में टीम तक्षशिला के महत्वपूर्ण सहयोगियों- अजीत कुमार मिश्रा एवं इंजी० रवि सिंह को क्रमशः मुख्य न्यासी एवं मानद न्यासी के रूप में मनोनीत किया गया। रमाकांत निषाद, सतीश सहरावत एवं डॉ० कमलेश काण्डपाल को कार्यकारिणी में समन्वयकों एवं एड० राहुल तिवारी को महाप्रबंधक के रूप में मनोनीत किया गया। कार्यक्रम के अंत में आचार्य श्रीवृत्त ने तक्षशिला के पुनर्निमाण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले विद्यापीठ एवं हिंगलाज मानव सेवा संस्थान न्यासों के सभी न्यासियों, परिषदीय प्रभारियों, राज्य प्रमुखों एवं समस्त सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए बैठक के समापन की घोषणा की।

ज्ञात हो कि हिंगलाज मानव सेवा संस्थान जो कि एक सार्वजनिक धर्मार्थ न्यास है, की तक्षशिला परियोजना के अंर्तगत उत्तर प्रदेश के लखीमपुर नगर में संचालित किए जाने वाले तक्षशिला विश्वविद्यापीठ नामक संस्थान में समाज के सभी वर्गों के योग्य छात्रों को निःशुल्क वैदिक, आधुनिक एवं खेल शिक्षा प्रदान की जाती है। इसके अलावा संस्थान छात्रों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं की पूर्व-तैयारी करवाता है एवं उनकी आत्मिक एवं आध्यात्मिक चेतना के उन्नयन व विकास के लिए योग एवं वैदिक शिक्षा पर आधारित विभिन्न पाठ्यक्रम एवं सत्र भी संचालित करता है। आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्रों के लिए विद्यापीठ द्वारा निःशुल्क छात्रावास सुविधा भी प्रदान की जाती है जहां पर छात्रों को निःशुल्क भोजन, आवास, चिकित्सा एवं शिक्षण प्रदान किया जाता है। हिंगलाज मानव सेवा संस्थान के द्वारा संचालित की जा रही इस तक्षशिला परियोजना के अंतर्गत 4 वर्ष से लेकर 7 वर्ष तक की आयु के बालक प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे बालक जिनके माता अथवा पिता में से कोई एक अथवा दोनों नहीं हैं अथवा जो आर्थिक रूप से अक्षम परिवारों से संबंध रखते हैं, तक्षशिला उन्हें अपने यहां प्राथमिकता से प्रवेश प्रदान करता है। 


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