दीपशिखा मंच ने किया गोष्ठी का आयोजन
*अवसाद* बढ़ते प्रतिशत पर विमर्श
हरिद्वार 22 जून डॉ० नरेंद्र प्रताप सिंह हिंदी विभाग अध्यक्ष देव संस्कृति विश्वविद्यालय की अध्यक्षता में हुई दीपशिखा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच की गोष्ठी का कुशल संचालन डॉ० मीरा भारद्वाज ने सरस्वती वंदना डॉ० सुशील त्यागी अमित ने की।
बढ़ती आत्महत्या के कारण अवसाद पर सृष्टि वर्मा ने कहा आपा -धापी, अंधी दौड़ और दबाव से उभरते हुए तनाव को दूर करने का उपाय *गीता* में है। सनी मिश्रा ने कहा शॉर्टकट और धैर्य की कमी इसके कारण है ।परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। शिक्षिका वृंदा शर्मा ने बाल मन को जानने की, प्रेमपूर्वक उनसे खुलकर बात करने की आवश्यकता को महत्वपूर्ण बताया। प्रभात रंजन ने माता-पिता की भूमिका को विशेष बताया और साथ ही मानवीय मूल्य और संस्कारों पर बल देने की बात कही। डॉ० प्रशांत कौशिक ने विषय की गंभीरता पर अपने विचार खुलकर साझा करते हुए कहा कि आज सबसे ज्यादा आवश्यकता है आपस में एक दूसरे को समझने की, स्त्री, पुरुष और साहित्यकार की समाज के प्रति जवाबदेही है ।उनकी भूमिका क्या होनी चाहिए इस पर अपने विचार व्यक्त किए।
पत्रकार एवं चिंतक डाॅ0 राधिका नागरथ,वरिष्ठ कवि एवं गीतकार भूदत्त शर्मा ,मन के स्तर का ज्ञान रखने वाले सुभाषमलिक संवेदनशील शशि रंजन समदर्शी,डॉ0अरुण पाठक संपादक चेतन पथ पत्रिका डॉ0 सुशील त्यागी जी और राजीव रंजन वर्मा ने सभी के विचारों को सुनते हुए अपनी अनुभवों को साझा किया। साथ हीप्रेरणा एवं उत्साह का संचार करते हुए अपने गीतों की प्रस्तुति दी। अध्यक्ष जी ने कहा समय, मन, प्रयोजन के संयोजन के लिए धारणा शक्ति की प्रबलता होनी चाहिए। स्वयं में सुधार करने की आवश्यकता है। हम सुधरेंगे तो जग सुधरेगा।
दीपशिखा मंच की अध्यक्ष डॉ० मीरा भारद्वाज ने सभी के सहयोग के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया।
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