उज्जैन में मनाया गया सदगुरुदेव स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज का 95वां अवतरण"दिवस

ब्रह्मलीन गुरुदेव श्रीस्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी महाराज का 94वाँ प्राकट्य महोत्सव श्रद्धा, आध्यात्मिक गरिमा एवं राष्ट्रचेतना के भाव के साथ सम्पन्न

उज्जैन 19 सितंबर महाकाल की पावन नगरी उज्जयिनी में सनातन धर्म की अद्वैत वेदान्त परम्परा के दिव्य आलोक-स्तम्भ, विश्वविख्यात भारत माता मन्दिर के संस्थापक ब्रह्मलीन श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य, श्रोत्रिय, ब्रह्मनिष्ठ, अनन्तश्रीविभूषित गुरुदेव भगवान श्रीस्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी महाराज का 94वाँ प्राकट्य महोत्सव अँजुश्री होटल परिसर में अत्यन्त श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ।

महोत्सव मध्यप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री डॉ. मोहन यादव जी के उत्सव पुरुषत्व एवं कर्नाटक के महामहिम राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत जी की मुख्य आतिथ्य गरिमा में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य, श्रोत्रिय, ब्रह्मनिष्ठ, अनन्तश्री विभूषित, जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर पूज्यपाद श्री स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज ने की।

इस अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री श्री कैलाश जी विजयवर्गीय, उज्जैन के प्रभारी मंत्री श्री गौतम जी टेटवाल, भारत माता मंदिर समन्वय सेवा ट्रस्ट के प्रेरक एवं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री परम पूज्य श्री स्वामी गोविन्ददेव गिरि जी महाराज, भारत माता मंदिर समन्वय सेवा ट्रस्ट, हरिद्वार के न्यासी परम पूज्य महामण्डलेश्वर श्री स्वामी अखिलेश्वरानन्द गिरि जी महाराज, परम पूज्य महामण्डलेश्वर श्री स्वामी ललितानन्द गिरि जी महाराज, साध्वी प्रज्ञा भारती जी, ट्रस्ट के महासचिव श्री आई.डी. शास्त्री जी, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री सत्यनारायण जटिया जी, सिंहस्थ विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री जगदीश अग्रवाल जी, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा जी एवं श्री सतीश मालवीय जी, मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष श्री सौभाग्य सिंह ठाकुर जी, मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष श्री ओम जैन जी, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. रवि सोलंकी जी, कार्यक्रम संयोजक श्री सुरेश मोढ़ जी, समन्वय परिवार उज्जैन के अध्यक्ष श्री टी.आर. थापक जी, पूर्व विधायक श्री संजय शुक्ला जी एवं महंत श्री राजेन्द्र भारती जी सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, संत-महात्मा, गणमान्यजन एवं देश-विदेश से जुड़े श्रद्धालु उपस्थित रहे।

महोत्सव में ब्रह्मलीन पूज्य गुरुदेव के विशेष पूजन-अर्चन, रुद्राभिषेक एवं संत भण्डारे का आयोजन हुआ। उपस्थित संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने ब्रह्मलीन पूज्य गुरुदेव के श्रीचरणों में श्रद्धासुमन अर्पित किए।

महाकाल की इस पावन भूमि पर ब्रह्मलीन गुरुदेव के प्राकट्य महोत्सव का यह आयोजन केवल एक महान संत का स्मरण नहीं, बल्कि सनातन परम्परा के मूल्यों को वर्तमान से जोड़ने और सिंहस्थ-2028 जैसे विराट आध्यात्मिक महापर्व को भव्य-दिव्य स्वरूप देने के सामूहिक संकल्प का अवसर भी बना।

उज्जयिनी की धरती पर महाकाल की कृपा, संतों का आशीर्वाद, शासन-प्रशासन का संकल्प और जन-जन की सहभागिता - इन्हीं के समन्वय से सिंहस्थ-2028 को ऐसा महापर्व बनाने का भाव व्यक्त हुआ, जो भारत की सनातन आध्यात्मिक चेतना की विराटता को विश्व के सामने प्रस्तुत करें।

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