संस्कृत प्रतियोगिता में हरिद्वार के प्रतिभागियों ने पाया विशिष्ट स्थान
डॉ. वाचस्पति मैठाणी की 77वीं जयंती पर संस्कृत प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा
हरिद्वार के तीन प्रतिभागियों ने बढ़ाया धर्मनगरी का गौरव
सुरेश मिश्रा, अनिरुद्ध बहुखंडी और डॉ. रेखा शर्मा ने अपनी-अपनी विधाओं में हासिल किया प्रथम स्थान
देश-विदेश तक गूंजी संस्कृत की स्वर लहरी
हरिद्वार। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षाविद् एवं संस्कृत पुरुष स्व. डॉ. वाचस्पति मैठाणी की 77वीं जयंती के अवसर पर आयोजित सप्तम अखिल भारतीय ऑनलाइन संस्कृत ज्ञान प्रतियोगिता-2026 के परिणाम वेबिनार के माध्यम से घोषित किए गए। प्रतियोगिता में देश के विभिन्न राज्यों के साथ न्यूजीलैंड और अमेरिका से भी प्रतिभागियों ने सहभागिता की। इस अवसर पर ‘संस्कृत भाषा से संस्कृति, संस्कार एवं आचरण का रक्षण’ विषय पर संगोष्ठी भी आयोजित की गई।
प्रतियोगिता में हरिद्वार के तीन प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी विधाओं में प्रथम स्थान प्राप्त कर हरि की नगरी धर्मनगरी हरिद्वार का गौरव बढ़ाया। बाल संस्कार मांगलिक श्लोक गान में सुरेश मिश्रा, संस्कृत देशभक्ति गीत गान में अनिरुद्ध बहुखंडी तथा स्तोत्र गान में डॉ. रेखा शर्मा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
सुरेश मिश्रा सिविल विद्यालय, भेल, सेक्टर-1, हरिद्वार के विद्यार्थी हैं। अनिरुद्ध बहुखंडी श्री जगद्गुरु श्रीचंद्र संस्कृत उत्तर माध्यमिक विद्यालय, भगवत धाम, हरिद्वार के विद्यार्थी हैं। वहीं डॉ. रेखा शर्मा राजकीय प्राथमिक विद्यालय दौड़वासी, बादशाहपुर, हरिद्वार में प्रधानाध्यापिका हैं। तीनों की सफलता से हरिद्वार के शिक्षण एवं संस्कृत जगत में खुशी का माहौल है।
कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तराखंड के पूर्व शिक्षामंत्री एवं स्मृति मंच के संरक्षक मंत्री प्रसाद नैथानी तथा परिजनों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। प्रथम सत्र में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर देवप्रयाग के निदेशक प्रो. पी.वी.बी. सुब्रमण्यम मुख्य अतिथि तथा महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय कैथल के पूर्व कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज अध्यक्ष रहे। डॉ. मैठाणी की धर्मपत्नी रुक्मणि देवी भी उपस्थित रहीं।
द्वितीय सत्र में उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार मुख्य अतिथि तथा उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा निदेशक मंजू भारती अध्यक्ष रहीं। आयुर्वेद रत्न डॉ. मायाराम उनियाल, समाजसेवी हरिप्रिया तुरखिया, कपार्ट के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक डॉ. भगवती प्रसाद मैठाणी, स्मृति मंच के अध्यक्ष केदार सिंह रौतेला एवं साहित्यकार शम्भू शरण रतूड़ी सहित अनेक विद्वान उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. मैठाणी ने संस्कृत को केवल भाषा के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संस्कार और जीवन-मूल्यों का आधार मानकर इसके संरक्षण-संवर्धन तथा सामाजिक चेतना के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। उन्होंने कहा कि डॉ. मैठाणी के कार्य आज भी संस्कृत प्रेमियों और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं तथा उनके कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
स्मृति मंच के संरक्षक मंत्री प्रसाद नैथानी ने बताया कि डॉ. मैठाणी की स्मृति में लगातार सातवीं बार आयोजित इस ऑनलाइन प्रतियोगिता में इस वर्ष 279 प्रतिभागियों ने विभिन्न विधाओं में प्रतिभाग किया। न्यूजीलैंड के कैंटरबरी-क्राइस्टचर्च से भुवनेश्वरी रतूड़ी तथा अमेरिका के नॉर्थ कैरोलाइना से उर्वांशी एवं औम्न्शी डोभाल की सहभागिता ने प्रतियोगिता को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। सोशल मीडिया के माध्यम से इस वर्ष 15 लाख से अधिक लोगों ने प्रतियोगिता में रुचि दिखाई, जबकि अब तक यह संख्या 60 लाख से अधिक पहुंच चुकी है।
प्रतियोगिता के राष्ट्रीय संयोजक कैलाशपति मैठाणी ने बताया कि बाल संस्कार मांगलिक श्लोक गान में सुरेश मिश्रा प्रथम, चित्रांश पांडे द्वितीय, देवाश जगूड़ी तृतीय रहे। संस्कृत देशभक्ति गीत गान में अनिरुद्ध बहुखंडी प्रथम, प्रनिल कल्पासी द्वितीय तथा हिमांशु शर्मा एवं इशिता भट्ट तृतीय रहे। प्रेरणादायक लघुकथा वाचन में सूरज नौटियाल प्रथम, संदीप नौटियाल द्वितीय एवं आस्था पुनेठा तृतीय रहीं। नीतिशतक श्लोक गान में रमेश सेमवाल प्रथम, बृजेश जोशी द्वितीय एवं सामश्रवा आर्य तृतीय रहे।
स्तोत्र गान में डॉ. रेखा शर्मा एवं पुष्पा कनवासी ने संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त किया। डॉ. भगत सिंह राणा ‘हिमाद’ एवं डॉ. अंजू श्रीवास्तव द्वितीय तथा नन्दन सिंह राणा एवं माधव सिंह नेगी तृतीय रहे। संस्कृत नृत्य के 9 से 13 वर्ष वर्ग में विद्या रावत प्रथम, पावनी जोशी द्वितीय एवं शिवांगी काला तृतीय रहीं। 14 से 18 वर्ष वर्ग में काव्या कांडपाल प्रथम, नंदिनी डंगवाल द्वितीय एवं साक्षी पोखरियाल तृतीय रहीं।
कैलाशपति मैठाणी ने बताया कि प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त विजेताओं को स्मृति-चिह्न तथा अन्य सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।
प्रतियोगिता की सफलता में मुंबई की समाजसेविका हरिप्रिया तुरखिया एवं कविता मैठाणी के सहयोग तथा आलोकपति मैठाणी एवं उन्नति मैठाणी के तकनीकी सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम का संचालन सुभाष डोभाल ने किया।
इस अवसर पर कमलापति मैठाणी, प्रो. विनय नौटियाल, डॉ. अनुसूया प्रसाद सुंदरियाल, डॉ. सुमन प्रसाद भट्ट, डॉ. आर.बी. सिंह, देवी सिंह पंवार, डॉ. अनंतमणि त्रिपाठी, कवि बेलीराम कंसवाल, अंकित पांडेय, डॉ. धीरज मैठाणी, डॉ. करूणापति मैठाणी, राकेश सेमवाल, संतोषी मैठाणी एवं डॉ. बबीता मैठाणी सहित अनेक परिजन, शिक्षाविद्, साहित्यकार, संस्कृत प्रेमी एवं प्रतिभागी ऑनलाइन जुड़े।
Comments
Post a Comment